भारत में सिल्वर नैनोवायर के सतत् प्रवाह निर्माण हेतु एक प्रायोगिक संयंत्र का शुभारम्भ

सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल), पुणे ने वृहद स्तर पर परिशुद्ध सिल्वर नैनोवायर के उत्पादन के लिए विश्व की सर्वाधिक सस्ती प्रौद्योगिकी का विकास किया है। डॉ. शेखर सी. मांडे, महानिदेशक, सीएसआईआर ने सीएसआईआर-एनसीएल परिसर में सिल्वर नैनोवायर के सतत् प्रवाह निर्माण हेतु एक प्रायोगिक संयंत्र का शुभारम्भ किया।

इस प्रौद्योगिकी का विकास एनसीएल के रासायनिक अभियांत्रिकी तथा प्रक्रिया विकास विभाग के डॉ. अमोल कुलकर्णी के नेतृत्व में एक टीम द्वारा किया गया है। यह प्रौद्योगिकी डीएसटी, भारत सरकार के द्वारा संचालित उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकी (एएमटी) कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। सिल्वर नैनोवायर का प्रयोग टचस्क्रीन, संचालक स्याही, थर्मल कोटिंग, आईआर शील्डिंग आदि सेक्टर में किया जाता है। भारत की अभी इन सेक्टर में कोई पहचान नहीं बनी है। अब, सीएसआईआर-एनसीएल में विकसित इस प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय उद्योग इस परिशुद्ध सामग्री के निर्माण क्षेत्र में प्रवेश कर पाएंगे। इस प्रौद्योगिकी को सुरक्षित रखने के लिए पेटेंट फाइल किए गए हैं।

इस अवसर पर डॉ. मांडे ने कहा कि सिल्वर नैनोवायर का वैश्विक बाजार बहुत बड़ा है, परन्तु भारत में इसका महानिदेषक, सीएसआईआर ने सिल्वर नैनोवायर संबंधित प्रायोगिक संयंत्र का षुभारम्भ किया अभी कोई निर्माता नहीं हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय निर्माताओं के लिए यह एक सुअवसर है कि वे इस क्षेत्र में आगे आएं क्योंकि इसमें काफी सम्भावनाएं हैं। इसके साथ ही सीएसआईआर सक्रिय रूप से इस उद्यम में प्रवेश कर सकता है। डॉ. कुलकर्णी ने इस प्रौद्योगिकी के विकास और एनसीएल की भूमिका के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में विभिन्न नियंत्रक मानकों के प्रयोग द्वारा यह सम्भव हो पाया। इसका उद्देश्य एक ऐसी प्रौद्योगिकी का सृजन करना था जो विश्वस्तरीय हो तथा इसका उपयोग इलेक्ट्रिकल रसायनों के क्षेत्र में हो सके।

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